प्रसव पीड़ा के लक्षण और कम करने के तरीके | How to identify and reduce labor pain

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पूरे नौ महीने का सफर एक गर्भवती महिला के लिए कुछ अलग कुछ खास होता है इसमें गर्भवती महिलाओं को कभी अच्छा और ज्यादातर समस्याओं भरा समय काटना पड़ जाता है  लेकिन यह सिलसिला यहीं पर खत्म नहीं होता है प्रेगनेंसी के पूरे 9 महीने का समय समाप्त होने के बाद अपने शिशु से मिलने के लिए महिला को प्रसव पीड़ा यानी कि लेबर पेन से गुजरना होता है जिसे प्रेगनेंसी के दौरान महसूस नहीं किया जा सकता है सिर्फ अंतिम दिनों में ही प्रसव पीड़ा के दौरान इससे होकर गुजरना पड़ता है और यह दर्द बहुत अधिक पीड़ादायक होता है और बहुत तेज होता है इसलिए गर्भवती महिलाएं पूरे 9 महीने यह सोच कर, कि प्रसव पीड़ा का दर्द कैसे झेला जाएगा कई बार बीमार भी पड़ जाती है या फिर डिप्रेशन में भी चली जाती है। 

लेख में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएंगे जिससे आपको प्रसव के समय आपको कम दर्द सहन करना पड़े। 

प्रसव पीड़ा कब शुरू होती है

प्रेगनेंसी के पूरे 40 सप्ताहों में  37 हफ्ते के मध्य से 40 हफ्ते तक के बीच में कभी भी गर्भवती महिला को प्रसव का दर्द शुरू हो सकता है और यह बतलाता है कि आप की डिलीवरी अब बिल्कुल निकट है और ऐसी डिलीवरी नॉर्मल डिलीवरी कहलाती है। कई मामलों में प्रेगनेंसी के 37 हफ्ते की शुरुआत या फिर अगर इससे पहले शिशु पैदा हो जाता है तो ऐसी डिलीवरी को प्रीमेच्योर डिलीवरी (premature delivery) कहा जाता है और कई तो मामलों में प्रेगनेंसी के 40 हफ्ते गुजर जाने के बाद भी डिलीवरी नहीं होती है तो ऐसे मामलों में कृतिम तरीकों का इस्तेमाल करके डिलीवरी करवाई जाती है। 

प्रसव पीड़ा के लक्षण 

गर्भाशय ग्रीवा का पतला होकर खुलना

प्रसव होने का अहम लक्षण होता है कि इस दौरान महिला की ग्रीवा पतली होकर खुलने लगती है और ग्रीवा का मुँह 10 सेंटीमीटर तक खुलना  शुरू हो जाता है और जब गर्भाशय ग्रीवा डिलीवरी के लिए तैयार हो जाती है तो म्यूकस प्लग के साथ खून भी बाहर निकले लगता है। गर्भ में शिशु खिसक कर श्रोणि क्षेत्र की तरफ आ जाता है और ऐसे में आपको पेट और पेट के निचले हिस्से, कमर और जांघों में दर्द होना शुरू हो जाता है और इस दौरान आपको कब्ज और पेट खराब होने की शिकायत भी हो जाती है. 

आलस थकान और कमजोरी  होना

अंतिम दिनों में आपको अधिक थकान और आलस भरपूर आने लगता है आपको कमजोरी भी महसूस हो सकती है क्योंकि  यह समय आपके शरीर को शिशु के पैदा होने के लिए तैयार कर रहा होता है इस दौरान सांस फूलना और नींद ना आने की समस्या आपको बहुत ज्यादा होती है अगर आपको आखिरी सप्ताह में कमजोरी के साथ नींद भी आती है तो आप समझ जाइए कि यह आपके प्रसव के निकट होने का एक संकेत हो सकता है। 

एमनियोटिक द्रव की थैली का फटना

डिलीवरी के नजदीक आते ही कई महिलाओं की एमनियोटिक द्रव(amniotic fluid) की थैली का फटना एक बहुत बड़ा संकेत होता है तो आपको इस दौरान प्रसव के लिए तैयार हो जाना है इस दौरान आपको तुरंत अपने डॉक्टर के संपर्क में चले जाना है क्योंकि एमनियोटिक द्रव की थैली का फटना गर्भ में शिशु और आपके लिए बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है इसमें देरी ना करें , थैली का फटना अचानक से बहुत अधिक पेशाब एक साथ निकल जाने जैसा होता है जिसमें कई बार महिलाएं समझ नहीं पाती है कि  यह पेशाब है या फिर  एमनियोटिक द्रव। 

संकुचन महसूस होना

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को पेट और कमर में दर्द की शिकायत रहती है लेकिन जैसे-जैसे डिलीवरी का समय निकट आता है ऐसे में यह संकुचन धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं और प्रसव पीड़ा के शुरू होने से पहले यह संकुचन(contraction) आपको बहुत तेजी से महसूस होते हैं आपके जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव शुरू हो जाता है और दर्द और ऐंठन लगातार बनी रहती है जिन्हें प्रसव पीड़ा का संकेत माना जाता है। 

बार-बार पेशाब आना

अंतिम दौर में आपको बार-बार पेशाब आने जैसा महसूस होगा हर 5 मिनट बाद अगर आपको पेशाब आ रहा हो या फिर आने जैसा महसूस हो तो यह प्रसव के निकट होने का एक संकेत होता है। 

शिशु के स्वागत की तैयारी

अगर महिलाएं प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर में बिना सोचे समझे नन्हें  शिशु के आने की छोटी मोटी तैयारियों में लग जाती है,  बच्चे से और खुद से संबंधित सामग्री खरीदने लगती है तो यह भी इस बात की ओर इशारा करता है कि आप की प्रसव पीड़ा जल्द ही शुरू होने वाली है। 

मूड स्विंग होना

प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर में भी गर्भवती महिलाओं के स्वभाव में बदलाव आ जाता है कई बार महिलाएं खुश तो कई बार दुखी हो जाती है,  कई बार चिड़चिड़ापन होना छोटी-छोटी बात पर गुस्सा करना, कई बार घबरा जाना, नाराज होना, खुश होना अगर गर्भवती महिला के साथ बहुत कम कम अंतराल में अचानक से होने लगता है तो भी आप समझ सकते हैं कि प्रसव पीड़ा का समय निकट आ चुका है। 

प्रसव पीड़ा कम करने के उपाय 

नॉर्मल डिलीवरी की प्रक्रिया से गुजरने के लिए महिलाओं को प्रसव पीड़ा झेलनी ही पड़ती है जो कि महिलाओं को शारीरिक रूप से बहुत अधिक पीड़ा देती है और तोड़ देती है। लेकिन कुछ उपाय करके प्रसव पीड़ा को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 

ज्यादा से ज्यादा टहलना

जब महिला का डिलीवरी समय निकट आने लगे तो महिला को ज्यादा से ज्यादा टहलना चाहिए, घूमना चाहिए।  जितना महिला गतिशील होती है टहलती  है ऐसे में प्रसव का दर्द महिलाओं में कम होता है इसीलिए डॉक्टर इस दौरान संकुचन होने पर भी टहलने की सलाह देते हैं। इसके अलावा आप इस दौरान कोशिश करें कि आप सही मुद्रा में ज्यादा से ज्यादा देर तक खुद को रखें। ऐसा माना जाता है कि खड़े होने पर प्रसव  जल्दी हो जाता है जबकि लेटने पर आपका ब्लड सर्क्युलेशन (blood circulation) धीमा हो जाता है जिससे डिलीवरी में काफी ज्यादा परेशानी आती है। 

अपने किसी खास को रखें हमेशा नज़दीक

 प्रसव के दौरान अपने साथ उस व्यक्ति को रखें जिससे आपका अधिक लगाव हो। चाहे वह आपके पति हो, मां, सास या बहन, ताकि आप भावनात्मक रूप से मजबूत बने और आपको अंदरूनी हिम्मत मिलती रहे और आपका यह दर्द आपको कम लगे महसूस हो। 

अरंडी के तेल का इस्तेमाल

अरंडी का तेल (Castor Oil) प्रसव के संकुचन लाने के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। आप चाहे तो इस तेल को अपनी नाभि पर लगा सकती हैं या फिर इसका सेवन करके आप अपने प्रसव को निकट लाकर इसे कम पीड़ा दायक बना सकती है अरंडी तेल का सेवन आपके गर्भाशय को लचीला बनाता है और इसे नाभि पर लगाने से महिलाओं की तुरंत डिलीवरी हो जाती है। 

अंजीर का सेवन

अंजीर(Figs) पोषक तत्वों से भरा हुआ एक फल है और यह कई बीमारियों से लड़ने के लिए काफी ज्यादा कारगर जाता है। अगर आप डिलीवरी से ठीक 1 हफ्ते पहले अंजीर का सेवन करना शुरू करती है तो ऐसे में आप को प्रसव पीड़ा काफी हद तक कम होती है

शहद और लौकी के मिश्रण का सेवन

प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए आप लौकी के जूस को शहद(honey) में मिलाकर पियें। आप लौकी को हल्का सा उबालकर इसके बाद इसके रस को निकाल ले, इसमें शहद  मिलाकर इसे प्रेग्नेंसी के अंतिम दौर में सेवन मे लें। 

श्वसन प्रक्रिया को लयबद्ध तरीके से करने का अभ्यास करें

 प्रेगनेंसी के अंतिम दौर से ही गर्भवती महिलाओं को ब्रीदिंग एक्सरसाइज(breathing exercises) जरूर करनी चाहिए ताकि प्रसव के दौरान आपकी एनर्जी बनी रहे, जो कि आपके डिलीवरी के समय बहुत ज्यादा काम आती है।  ब्रीदिंग एक्सरसाइज आपकी नॉर्मल डिलीवरी होने में काफी ज्यादा मददगार होता है और साथ ही आपके शिशु को भी सही तरीके से ऑक्सीजन मिलती रहती है, आपकी सांस फूलने की दिक्कत इस दौरान कम बन बनी रहती है। 

भरपूर मात्रा में पानी का सेवन 

प्रेगनेंसी के अंतिम दौर में आपको पानी का सेवन 8 – 10  ग्लास  जरूर करना है क्योंकि अंतिम दौर में महिला को बहुत अधिक प्यास लगती है ऐसे में पानी महिला के शरीर को हाइड्रेट रखता है साथ ही डिलीवरी के समय होने वाली छोटी मोटी दिक्कतों को दूर करता है ताकि नॉर्मल डिलीवरी कम पीड़ा के साथ आराम से हो सके। 

तुलसी के रस का सेवन

प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए आप तुलसी के रस का सेवन करें। लेबर पेन के समय आप तुलसी के पत्तों का रस  थोड़ी थोड़ी देर के अंतराल में एक-एक चम्मच आवश्यक सेवन में लें, इससे आपको लेबर पेन से काफी ज्यादा राहत मिलेगी। 

डिलीवरी के समय प्रसव दर्द कम करने की टिप्स

इसके अलावा दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि प्रसव के समय अगर आप अपनी हथेली में एक कंघी को जोर से दबा कर रखें या फिर चुंबक को रेशम के कपड़े में बांधकर उसे प्रेग्नेंट महिला के हाथ में पकड़ा दे तो ऐसे में शिशु का जन्म आसानी से होता है और प्रसव पीड़ा भी कम होती है। 

प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए ऊपर बताए गए कुछ उपाय आप अपने लिए अपना सकते हैं जो कि आपके लिए मददगार हो सकते हैं। और सबसे अहम् बात की अंतिम समय में आप लगातार अपने डॉक्टर से संपर्क में रहें। आपकी गर्भावस्था को स्वस्थ और सुरक्षित बनाना ही हमारे इस लेख का पहला उद्देश्य है।

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